हागिया सोफ़िया मस्जिद पर ऐतिहासिक जीत पर पूरे तुर्की में ‘अल्लाहू अक़बर’ की गूँजी सदायें

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तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान ने आखिरकार ऐतिहासिक हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम को दोबारा मस्जिद में बदलने के आदेश जारी कर दिए।

बीबीसी के अनुसार, इससे पहले शुक्रवार को ही तुर्की की एक अदालत ने हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम को मस्जिद में बदलने का रास्ता साफ़ कर दिया था। कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि हागिया सोफ़िया अब म्यूज़ियम नहीं रहेगा और 1934 के कैबिनेट के फ़ैसले को रद्द कर दिया।

जानकारी के अनुसार, इस विश्व प्रसिद्ध इमारत का निर्माण लगभग 532 ईस्वी में बाइजेंटाइन साम्राज्य के शासक जस्टिनियन ने किया था। उस समय इस शहर को कुस्तुनतुनिया या कॉन्सटेनटिनोपोल के नाम से जाना जाता था। 537 ईस्वी में निर्माण पूर्ण होने के बाद इस इमारत को चर्च बनाया गया।

हालांकि 1453 में इस्लामी ऑटोमन साम्राज्य सुल्तान मेहमत द्वितीय के हाथों इस शहर पर जीत के बाद कुस्तुनतुनिया का नाम बदलकर इस्तांबुल कर दिया गया। वहीं कुछ साल बाद इस चर्च में खरीदकर मस्जिद बना दिया। पहले विश्व युद्ध में तुर्की की हार के बाद 1934 में इस मस्जिद (मूल रूप से हागिया सोफ़िया चर्च) को म्यूज़ियम बनाने का फ़ैसला किया गया।

हागिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में बदले पर यूनेस्को ने भी आपत्ति जताई थी। यूनेस्को ने कहा कि सरकार किसी भी निर्णय से पहले उनसे जरूर बातचीत करे। 1500 साल पुरानी यह इमारत यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल में शामिल है। यूनेस्को के प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी प्रकार के परिवर्तन से पहले तुर्की को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके सार्वभौमिक मूल्य प्रभावित न हों। इसके लिए विश्व धरोहर समिति की जांच भी जरूरी है।

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